दुश्मन.. !

तड़पता है मेरे भीतर
कोई
मुझसा
मचलता है बार-बार
बच्चों की तरह
जिद करता है
हर उस बात के लिए
जो मुझे अच्छी नहीं लगती।

वह
सफेद दाढ़ी वाले मौलाना को भी
साधू समझता है !
जबकि मैं उसे समझाता हूँ ..
‘हिन्दू’ ही साधू होते हैं
वह तो ‘मुसलमान’ है !

वह
गंदे-रोते बच्चे को देख
गोदी में उठाकर चुप कराना चाहता है
जो सड़क के किनारे
भूखा, नंगा, भिखारी सा दिखता है !
मैं उसे डांटता हूँ
नहीं s s s
वह ‘मलेच्छ’ है।

वह
करांची में
आतंकवादियों के धमाके से मारे गए निर्दोष लोगों के लिए भी
उतना ही रोता है
जितना
कश्मीर के अपने लोगों के लिए !
मैं उसे समझाता हूँ
वह शत्रु देश है
वहाँ के लोगों को तो मरना ही चाहिए।

मेरा समझाना बेकार
मेरा डांटना बेअसर
वह उल्टे मुझ पर ही हंसता
मुझे ऐसी नज़रों से देखता है
जैसे मैं ही महामूर्ख हूँ !

अजीब है वह
हर उस रास्ते पर चलने के लिए कहता है
जो सीधी नहीं हैं
हर उस काम के लिए ज़िद करता है
जिससे मुझे हानि और दूसरों को लाभ हो !

मै आजतक नहीं समझ पाया
आखिर उसे
मुझसे क्या दुश्मनी है!

Advertisements

51 thoughts on “दुश्मन.. !

  1. @ अजीब है वहहर उस रास्ते पर चलने के लिए कहता हैजो सीधी नहीं हैंहर उस काम के लिए ज़िद करता हैजिससे मुझे हानी और दूसरों को लाभ हो !अज़ीबों के कारण ही यह संसार रहने योग्य है। आशा है कि वह अज़ीब ऐसे ही ज़िद करता रहेगा। मलिच्छ – मलेच्छ हानी – हानि

  2. राहत ये कि वो मेरे ही भीतर से प्रकटता है और मेरे प्रेम को बिखेर देता है धरती पर ! दुआ ये कि इस दुश्मन को जीवित रहना चाहिये धरती पर जीवन की हर उम्मीद के अंतिम क्षण तक !

  3. वहकरांची मेंआतंकवादियों के धमाके से मारे गए निर्दोष लोगों के लिए भीउतना ही रोता हैजितनाकश्मीर के अपने लोगों के लिए !मैं उसे समझाता हूँवह शत्रु देश हैवहाँ के लोगों को तो मरना ही चाहिए।Kya baat hai! "Qudrat ne to bakshi thi hame ekhi dharti,Hamne kahin Bharat kahin Iran banaya!"

  4. वाज़िब जिद्द करता है वो। बहुत सुन्दर तरीके से आपने आदमी के मन की कशमक्श और आज के हालात मे कैसे वो बिना सोचे समझे इन्सानियत का गला घोंटना चाहता है ,दर्शाया है। अजीब है वहहर उस रास्ते पर चलने के लिए कहता हैजो सीधी नहीं हैंहर उस काम के लिए ज़िद करता हैजिससे मुझे हानी और दूसरों को लाभ हो लाजवाब अभिव्यक्ति। शुभकामनायें

  5. आत्मा का मन से विद्रोह!!सुंदर भाव प्रतिबिंबित हुए, बधाई!!हर उस रास्ते पर चलने के लिए कहता हैजो सीधी नहीं हैंहर उस काम के लिए ज़िद करता हैजिससे मुझे हानी और दूसरों को लाभ हो आत्मा की सुनु या मन की? वाह

  6. मै आजतक नहीं समझ पायाआखिर उसेमुझसे क्या दुश्मनी है! hame ye dushmani achchhi lagi……kaash aisee dushmani har vyakti me ho, aur dushman bhari pad jaye..:)behtareen…………:)

  7. बहुत ही उम्दा … लाभ और हानि को वो क्या जाने जो सच मायने में साधु है … जो बस साधु होता है हिंदू या मुसलमा नही होता …. बहुत अच्छा लिखा है …

  8. हई देखिये देवेंद्र जी! ई जनाब को एतना दिन से हम खोज रहे थे अऊर ई आपके अंदर लुका कर बईठे हुए थे… सोचे थे कि अपने पास बुलाकर रखेंगे बाकी अब संतोस हो गया कि ऊ जहाँ भी हैं,हिफाज़त से हैं… खाली एगो रिक्वेस्ट है कि उनको दुस्मन मत बोलिए..हमरे जइसा समझिए उनको.. हम त एही कहकर समझा लेंगे अपनाए आप को किमेरे सीने में नहीं तो, तेरे सीने में सही!

  9. ………!कल अली-सा ने मेरे नए ब्लॉग 'आनंद की यादें' में एक, एक क्या, एक मात्र कमेंट लिखा था…..दूसरे ब्लॉग को भी थोड़ी-थोड़ी डोज़ देते रहें वर्ना …! आज मैने उनका आदेश मानकर सुबह यह कविता पोस्ट की और अभी ब्लॉग खोला तो इतने सारे कमेंट देख कर प्रफुल्लित होने के साथ-साथ अचंभित भी हूँ। जिन शुभ चिंतकों को मैं अपने नए ब्लॉग में विगत 10 दिन से ढूंढ रहा था वे अकस्मात यहाँ अवतरित हो गए! जब कि मैने लगातार एक के बाद एक 4 पोस्ट झोंक दिया ! आप में से कुछ वहाँ एकाध बार गए भी तो दुबारा नहीं आए..! आप वहाँ आएं इसी लोभ में इस ब्लॉग में बहुत दिनों से कोई पोस्ट नहीं डाली थी। लेकिन अली-सा का आदेश टाल नहीं सका। कहानी न पढ़ने के पीछे दो ही कारण हो सकते हैं..एक तो यह कि लोग लम्बी कहानी पढ़ना पसंद नहीं करते या फिर दूसरा यह कि मेरा कहानी लेखन बेकार चल रहा है। मुझे सही स्थिति की जानकारी हो तो मैं भी दो में से एक काम कर सकता हूँ.. कहानी लिखनी जारी रख सकता हूँ या बंद कर सकता हूँ। वैसे मेरा मन कहता है..कोई पढ़े या ना पढ़े लिखते रहो! आप सभी का सुझाव अपेक्षित है।…इस प्यार और स्नेह के लिए सभी का आभारी हूँ।

  10. मेरा समझाना बेकारमेरा डांटना बेअसरवह उल्टे मुझ पर ही हंसतामुझे ऐसी नज़रों से देखता हैजैसे मैं ही महामूर्ख हूँ !बहुत उचित कहा आप ने, बहुत सुंदर रचना जी धन्यवाद

  11. देवेन्द्र जी, अगर इस रचना को… आपकी सर्वश्रेष्ठ कृति कहा जाए…तो अतिश्योक्ति नहीं होगी…क्या कुछ नहीं कह गए आप…इतना बड़ा संदेश देने के लिए बधाई.

  12. अरे…….अरे…….ये आप क्या कह रहे हैं.????अपने सबसे करीब और अज़ीज़ दोस्त को आप अपना दुश्मन समझ रहे हैं……!!!!!!चलिए, अपने उस दोस्त को दुश्मन समझने के लिए सॉरी कहिये और झफ्फी पाइए यानी गले लगिए.फिर, देखना आपको खुद अपनी भूल समझ में आ जायेंगी. फिर, आप उसे अपना सबसे अच्छा, प्यारा, और करीबी मित्र कहेंगे.चलिय-चलिए, एक बार मेरे कहे अनुसार उस कथित दुश्मन को सॉरी कह कर गले लगाइए.बहुत, बढ़िया.धन्यवाद.WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  13. आपका दूसरा ब्लॉग बहुत अच्छा हैं.लेकिन, गोपनीयता के कारण और सुरक्षा कारणों से मैं उस ब्लॉग पर कमेन्ट नहीं कर सकता हूँ.जिसके लिए मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ.(अगर आप कहें तो उस ब्लॉग पर कमेन्ट करने की बजाय मैं आपके इस ब्लॉग पर कमेन्ट कर दूंगा. आप उस ब्लॉग को ना छोडिये, लिखते रहिएगा.)धन्यवाद.WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  14. मै आजतक नहीं समझ पायाआखिर उसेमुझसे क्या दुश्मनी है!kitana masoom sawal hai nasundar abhvykti ke liye badhai

  15. आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

  16. बहुत ही मार्मिक रचना..जैसे कि अंतरात्मा की आवाज!…….जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बधाई और अनिको शुभ्काम्नाएं!… उपन्यास के लिए आप शैलेश जी से संपर्क करें!…धन्यवाद!

  17. वो निदा फाजली साहब का एक कलाम है न :दो और दो मिल कर हमेशा चार कहाँ होतें है,इन सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला !सुन्दर भावाव्यक्ति …

  18. पांडे जीइशारों इशारों में बात बहुत दूर तक ले गए आप….. विचारोत्तेजक कविता लिखने और हम सब तक पहुँचाने का दिली शुक्रिया

  19. ऐसे दुश्मन सब को नसीब हों, ताकि इंसानियत जिन्दा रहे।बहुत अच्छा लिखा है आपने, आभार स्वीकारें।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s