सबसे अच्छे बापू…!


बापू
मैं जब भी आपकी तश्वीरें देखता हूँ
आप मुझे उतने अच्छे नहीं लगते वकील के कोट में
जितने अच्छे लगते हैं
धोती या लंगोट में !
दिल की बात सच-सच कह दूँ बापू !
आप सबसे अच्छे लगते हैं
पाँच-दस नहीं,
सौ-पचास भी नहीं,
पाँच सौ भी,
जब आते हैं….
हजार रूपए के नोट में !  
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33 thoughts on “सबसे अच्छे बापू…!

  1. गांधी जयंती में तो छोड़ देतें बापू जी को जनाब !चुटीली रचना, लिखते रहिये …

  2. बापू की सादगी आज कहाँ है …. १००० के नोट में डाल कर वो सादगी ही ख़त्म कर दी नई सरकार नें …. ये नेता भी तो बापू के नाम पर खा रहे हैं …

  3. आज सभी बापू के राग गा रहे है , जो सही नेता है उसे सब भुल गये…. आज के दिन ही जन्मे थे हमारे लालबहादुर-गांधी जी जो एक सच्चे नेता थे,आज के दिन मेरा इन दोनो को शत शत नमन

  4. क्या बात कही देवेन्द्र जी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जब भी वोडाफोन के कैश पेमेंट के लिए कियोस्क पर जाता हूं तो वह बिना गाँधी वाली तस्वीरों को अंदर लेने में मना कर देता है…जैसे ही कोई दस का नोट या पांच सौ का नोट जिस पर गाँधी हों…ये तुरंत ले लेता है। मशीन भी गाँधी को मानती है शायद :)( दरअसल वोडाफोन के कियोस्क में सेटिंग है कि बिना गाँधी वाली नोटों को एक्सेप्ट न करे, ताकि नकली नोट की संभावना कम से कम रहे )

  5. मतलब यह है कि बिना गांधीजी का नाम लिए तो हमारा कोई भी काम नहीं चलता। आपकी रचना पढ़कर याद आया कि हिन्‍दुस्‍तान में रिश्‍वत भी गांधी को साक्षी मानकर ही दी जाती है। और लोग कहते हैं कि हमने गांधी को भुला दिया। वे तो हमारी रग रग में बसे हैं। उनकी फोटू वाले कागज ही तो हमें सब कुछ देते हैं।

  6. सार्थक कविता. मै भी समर्पित करता हूँ अपनी ये लाइनें- देखता हूँ चुनावों में बंटते आपके फोटो वाले नोट,वह भी जेब में रखकर चलता है आपको ,जिसके दिल में है खोट. यह सब देख कर हम जैसों के दिलों को बार-बार लगती है चोट !

  7. वाह क्या बात…!!! राष्ट्र की मानसिकता ही लिख डाली आपने…! बहुत आभार.. देवेन्द्र भईया आपकी अक्वारियम घडी आपका भाई शेयर कर ले?

  8. इस तमाचे की आवाज भी नही आती..बस गाल सहलाता खड़ा हूँ..गाँधी मुझे भी बार-बार याद आते हैं..एटीएम से निकलते गाँधी..डांस-बारों मे बरसते गाँधी..ईएमआई मे बंटते गाँधी..लाल गाँधी, हरे गाँधी, काले गाँधी..टेबल के ऊपर गाँधी..टेबल के नीचे गाँधी..बेड के नीचे बिछे गाँधी..स्विटजरलैंड मे हवा खाते गाँधी..सारा देश अब गाँधीमय हो गया है…मगर कोई बूढ़ा है जो अभी भी रात मे गलियों मे कहीं रोता है..बस आवाज नही आती…

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