गुस्सा बहुत बुरा है। इसमे जहर छुपा है।

आज हम सब के प्यारे चाचा नेहरू का जन्म दिवस है।  14 नवंबर 1889 को ईलाहाबाद में जन्मे भारत के प्रथम प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस को हम ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाते हैं। प्रस्तुत है एक बाल गीत जिसका शीर्षक है…

गुस्सा
गुस्सा बहुत बुरा है। इसमे जहर छुपा है।

मीठी बोली से सीखो तुम,  दुश्मन का भी मन हरना
जल्दी से सीखो बच्चों तुम,  गुस्से पर काबू करना।

बाती जलती अगर दिए में,  घर रोशन कर देती है
बने आग अगर फैलकर,  तहस नहस कर देती है।
बहुत बड़ा खतरा है बच्चों, गुस्सा बेकाबू रहना
जल्दी से सीखो बच्चों तुम,  गुस्से पर काबू करना।

खिलते हैं जब फूल चमन में, भौंरे गाने लगते हैं
बजते हैं जब बीन सुरीले, सर्प नाचने लगते हैं।
कौए-कोयल दोनों काले किसको चाहोगे रखना
जल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।
करता सूरज अगर क्रोध तो सोचो सबका क्या होता
कैसी होती यह धरती और कैसा यह अंबर होता।
धूप-छाँव दोनों हैं पथ में, किस पर चाहोगे चलना
जल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।
करती नदिया अगर क्रोध तो कैसी होती यह धरती
मर जाते सब जीव-जन्तु, खुद सुख से कैसे रहती।
जल-थल दोनो रहें प्यार से या सीखें तुम से लड़ना
जल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।
इसीलिए कहता हूँ बच्चों, क्रोध कभी भी ना करना
जब तुमको गुस्सा आए तो ठंडा पानी पी लेना।
हर ठोकर सिखलाती हमको, कैसे है बचकर चलना
जल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।

गुस्सा बहुत बुरा है। इसमे जहर छुपा है।

(प्रस्तुत कविता हिंद युग्म में प्रकाशित है)
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39 thoughts on “गुस्सा बहुत बुरा है। इसमे जहर छुपा है।

  1. गुस्सा बहुत बुरा है। इसमे जहर छुपा है।यकीनन .. बहुत सुन्दर सन्देश

  2. रचना तो काफी फलसफे वाली है, बच्चों से ज्यादा तो हमें वयस्कों के लिए लगी … बच्चों को तो बचपने वाली भाषा में ही समझाना चाहिए, ऐसा मेरा मत है….कविता वो दमदार है… लिखते रहिये ….

  3. बहुत हृदयस्पर्शी बाल कविता, आपकी तो काव्य प्रतिभा विलक्षण है आनंद जी ……

  4. बहुत बढ़िया रचना है देवेंद्र जी ,ये बच्चों से ज़्यादा हम बड़ों को सीखने की ज़रूरत है ,इस सार्थक पोस्ट के लिये बधाई

  5. इसीलिए कहता हूँ बच्चों, क्रोध कभी भी ना करनाजब तुमको गुस्सा आए तो ठंडा पानी पी लेना।हर ठोकर सिखलाती हमको, कैसे है बचकर चलनाजल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।आज बहुत सुन्दर सन्देश दिया है बच्चों को बाल दिवस पे उपहार अच्छा लगा। नेहरू जी को सादर श्रद्धाँजली।

  6. करता सूरज अगर क्रोध तो सोचो सबका क्या होताकैसी होती यह धरती और कैसा यह अंबर होता …सार्थक कविता आज के दिन देवेन्द्र जी … आपको बाल दिवस ही हार्दिक शुभकामनाएं …

  7. ये गीत बच्चों को गवाने के लिये ठीक है.मगर गुस्सा या क्रोध प्राकृतिक गुण है जो ये समझनेसे खत्म नहीं होता की ये बुरा है.

  8. बाल दिवस पर सुन्दर सीख देती कविता ! देवेन्द्र जी आप सुन्दर मन: ब्लागर हैं !

  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 16 -11-2010 मंगलवार को ली गयी है …कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ …शुक्रिया

  10. बिलकुल सही बात है देवेन्द्र जी ….क्रोध तो मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है….और गीत के माध्यम से बच्चों को ये सिख बहुत सुन्दर प्रयास….शुभकामनायें|

  11. बाल दिवस के परिप्रेक्ष में सबों के लिए सन्देश परक व साथर्क रचना .. हमें भी मनन अवश्य करना चाहिए . बधाई ………

  12. वन्दे मातरम,यह सिख केवल बच्चों के लिए ही नहीं वरन हम सभी के लिए उपयोगी है…सार्थक एवं प्रभावी लेखन के लिए सादर शुभकामनायें |

  13. बच्चों को बहुत अच्छा सन्देश दिया है आपने बाल दिवस पर.ये कविता सभी के लिए सार्थक है.

  14. बाती जलती अगर दिए में, घर रोशन कर देती हैबने आग अगर फैलकर, तहस नहस कर देती है।बहुत बड़ा खतरा है बच्चों, गुस्सा बेकाबू रहनाजल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।वाह…..क्या बात है …..!!करता सूरज अगर क्रोध तो सोचो सबका क्या होताकैसी होती यह धरती और कैसा यह अंबर होता।धूप-छाँव दोनों हैं पथ में, किस पर चाहोगे चलनाजल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना।क्या कहूँ देवेन्द्र जी ….?हर पंक्ति जीवन का फलसफा सिखाती है …..कितने सरल सहज शब्दों में आपने जीवन की तमाम सीख दे दी ….इस बाल कविता के लिए आपको नमन है ……!!अभी मैं सोच ही रही थी कि पिछली पोस्ट पर आप नहीं आये ..पता नहीं कहाँ व्यस्त हैं ….कि आप कि हाजरी लग गई ….

  15. .खिलते हैं जब फूल चमन में, भौंरे गाने लगते हैंबजते हैं जब बीन सुरीले, सर्प नाचने लगते हैं।कौए-कोयल दोनों काले किसको चाहोगे रखनाजल्दी से सीखो बच्चों तुम, गुस्से पर काबू करना…—–सार्थक एवं प्रेरणादायक पोस्ट !.

  16. देवन्द्र जी,आपकी कविता बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी सीख देती हुई भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति है ! कविता तो सभी लिखते हैं मगर बच्चों के लिए सहज कविता लिखना बहुत ही मुश्किल है !बधाई !-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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