नव वर्ष मंगलमय हो।

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हे नववर्ष ! न आते तुम तो जान ही नहीं पाता कि लोग कितना प्यार करते हैं मुझसे ! कितने सारे मेल भेज हैं लोगों ने मुझे ! किसी किसी ने तो मेल के पंपलेट ही छाप दिये हैं सौ-पचास एक साथ। वाह ! कितने प्यारे-प्यारे मैसेज हैं ! लगता है नया साल पक्का अच्छा होगा। देर तक जागने वाले देर रात तक और भिनसहरे उठने वाले मुंह अंधेरे मैसेज पर मैसेज भेजे जा रहे हैं। फोन आ रहे हैं…नया साल है, सोना जरूरी है क्या ? अरे नया साल है उठो ! क्या सो रहे हो ? अभी तक कम सोये ! कब जगोगे ? न रात को समय से सोने दे रहे हैं न सुबह देर तक सोने दे रहे हैं। ऐसे-ऐसे यक्ष प्रश्न पेले जाते हैं कि युधिष्ठिर भी बेहोश हो जायं। कब जगोगे ? स्वयम् भगवान बुद्ध को भी इसका ज्ञान न था कि वे कब जगेंगे ! मैं कैसे बता दूँ ? जब से होश संभाला जगने का ही तो प्रयास कर रहा हूं ! कुछ लोग बिना जगे जगाने लगते हैं ! उन्हें ऐसा लगता है कि वे जग चुके हैं। कितनी बुरी बात है ! खुद नींद में रहने वाला दूसरे को जगाता फिरे। कुछ लोग रात देर तक जगते रहते हैं। जब तक की घड़ी की सुईयाँ एक दूसरे से गले न मिल लें। 12 बजते ही अचानक से चीखने लगते हैं । घड़ी की सुई, बदलती तारीखें नये वर्ष का पक्का सबूत होती हैं। कुछ लोग कहते हैं- नहीं……! हम रात को नववर्ष नहीं मनायेंगे। आंग्ल नववर्ष को अपनाना है तो पूर्णतया भारतीय संस्कृति में ढाल दो ! रात को सुईयाँ मिलें तो सभी चीखते हैं, हम नववर्ष तब मनायेंगे जब सूर्योदय होगा। यह बात मुझे भी ठीक लगती है। या तो पूर्णतया उनके में ढल जाओ या पूर्णतया उनको अपने में ढाल लो । आधी-अधूरी जिंदगी जीना खुद को धोखा देना है।
ई-मेल का जवाब इसलिए नहीं दे पा रहा कि नेट का सिगनल एकदम खऱाब है। खुल गया यही कम है ! मैसेज का जवाब इसलिए नहीं दे पा रहा कि बैलेंस नहीं है ! एक भी मैसेज मोबाइल टॉपअप वाला नहीं आया..! Your account balance is credited with Rs. 99.56 paise….सभी शुभ चिंतक हैं लेकिन कोई इतना बड़ा शुभचिंतक नहीं मिला। जब भी किसी को फोन करो मोबाइल से बड़ी कातिल आवाज आती है….. आपका अकाउन्ट बैलेंस कम है। आपके पास है…एक….शून्य प्रभार दो…धत्त तेरे की ! अभी 2 दिन पहले तो 110/- का टॉप अप भरवाया था ! किसने उड़ा दिये ! अब इतनी सुबह करूँ तो क्या करूँ ? सोचा, नहा लूँ ! नहा धोकर साफ-साफ लिखूँ ! मगर यह क्या ! बिजली नहीं है ! कल शाम थोड़ी बूंदा-बांदी क्या हुई बिजली रानी रात से ही गायब है। लगता है फिर किसी राजनीति की शिकार हो गई। जब करने के लिए कुछ न मिला तो यही छाप रहा हूँ। शुक्र है कि लैपटॉप चल रहा है। नया है न ! नई चीज खूब चलती है । पुरानी होते ही खरखराने लगती है। लगता है नेट कनेक्शन मिल रहा है। जल्दी से इसे पोस्ट कर दूँ। कुछ गलत लिख दिया हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ।
नव वर्ष मंगलमय हो।

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20 thoughts on “नव वर्ष मंगलमय हो।

  1. नव वर्ष में सब चिंताओं से छुटकारा पायें , यही कामना है ।आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ।

  2. आदरणीय देवेन्द्र पाण्डेय जी सादर प्रणाम आपकी पोस्ट विचारणीय है …..आपको नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ..स्वीकार करें

  3. बहुत बढ़िया देवेन्द्र जी…..काफी कठिन परिस्थिति है……भीड़ में एक नाम और शामिल कर देते हैं जी……हमारी भी बधाई…..ये लाइन आपने बहुत खूब लिख दी है इस पोस्ट में काफी दार्शनिक लगी- "कुछ लोग बिना जगे जगाने लगते हैं ! उन्हें ऐसा लगता है कि वे जग चुके हैं। कितनी बुरी बात है ! खुद नींद में रहने वाला दूसरे को जगाता फिरे।"

  4. "कुछ लोग बिना जगे जगाने लगते हैं ! उन्हें ऐसा लगता है कि वे जग चुके हैं। कितनी बुरी बात है ! खुद नींद में रहने वाला दूसरे को जगाता फिरे।" बहुत खूब आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ।

  5. लगता है आप किसीको शुभकामनाएं नहीं भेजते,शायद इसीलिए लोगों को अधिक परेशानियां होती हैं.किसी का साल सुख-शान्ति से नहीं गुजरता.

  6. पुरानी होते ही खरखराने लगती है:) क्या पाण्डेय जी, इत्ती सी बात कहने के लिये इतने बहाने, हा हा हा।ध्यान रखिये, हर चीज का टाप-अप नहीं आता:)नये साल की बधाई।

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