शंका

ऊषा की सुनहरी किरणों से
संध्या की लाली से
सशंक रहता है
चकोर
कहीं मेरे चाँद को
रंग न दें
अपने रंग में !

काले बादलों की ओट से
हँसता-खिलखिलाता
हमेशा की तरह उज्ज्वल
निकलता है
पूनम का चाँद।
………………………….

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29 thoughts on “शंका

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी हैकल (18-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकरअवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।http://charchamanch.blogspot.com/

  2. यही तो चाहत और समर्पण की चरम सीमा है जो सबसे छुपा कर रखना चाहता है ।बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति…आभार !

  3. काले बादलों की ओट सेहँसता-खिलखिलाताहमेशा की तरह उज्ज्वल निकलता है पूनम का चाँद। — खूबसूरत भाव…

  4. इसका मतलब ओरिजिनल चकोर प्रजाति लुप्त हो गयी उसके बजाय कोई हमेशा शंका करने वाली हाइब्रिड प्रजाति आ गयी है -कवि इसलिए ही संतप्त हो उठा है !

  5. ऊषा की सुनहरी किरणों सेसंध्या की लाली सेसशंक रहता हैचकोरकहीं मेरे चाँद कोरंग न देंअपने रंग में !खूबसूरत अभिव्यक्ति…….

  6. आपको एवं आपके परिवार को भगवान हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।अंत में :- श्री राम जय राम जय रामहारे राम हारे राम हारे रामहनुमान जी की तरह जप्ते जाओअपनी सारी समस्या दूर करते जाओ!! शुभ हनुमान जयंती !!आप भी सादर आमंत्रित हैं, भगवान हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ

  7. चाँद खुश रहता है हमेशा क्योंकि शंका करनेवाला उससे बहुत दूर है,अगर पास ही होता तो उसका जीना भी दुश्वार हो जाता.

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