फेसबुक

सभी फेस
बुक की तरह होते हैं

कुछ छपते हैं
सिर्फ सजने के लिए
बड़े घरों की आलमारियों में
कुछ इतने सार्वजनिक
कि उधेड़े जाते हैं
खुले आम
बीच चौराहे
चाय या पान की दुकानो में

कुछ शीशे की तरह पारदर्शी
खुलते ही चले जाते हैं
पृष्ठ दर पृष्ठ
कुछ आइने की तरह
रहस्यमयी
करते
सबका चीर हरण।

कुछ जला दिये जाते हैं
बिन पढ़े
दफ्ना दिये जाते हैं
बिन खुले

कुछ ऐसे भी होते हैं
जो संसार का फेस चमकाने का
बीड़ा उठाये
बूढ़े घर के सिलन भरे कमरे में कैद
घुटते रहते हैं सारी उम्र
जिन्हें
बेरहमी से
चाट जाते हैं
वक्त के दीमक।

…………………………

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35 thoughts on “फेसबुक

  1. कुछ ऐसे भी होते हैं जो संसार का फेस चमकाने का बीड़ा उठायेबूढ़े घर के सिलन भरे कमरे में कैदघुटते रहते हैं सारी उम्रजिन्हें बेरहमी से चाट जाते हैंवक्त के दीमक।sahi kaha

  2. It`s a very nice poem.The last lines r too sensitive,u r a poet and has entered into the damp rooms of many true men,who`s labourious works will change the world.Here,i disagree with u….कुछ जला दिये जाते हैं बिन पढ़ेदफ्ना दिये जाते हैं बिन खुलेwithout reading,most face books are burned,not only few.

  3. देव बाबू,फेसबुक की मिसाल क्या खूब दी है आपने……बहुत ही शानदार पोस्ट…….भूले-भटके हमारे ब्लॉग पर भी आ जाया कीजिये|

  4. काफी दिन हो गये थे आपको बांचे बिना !हमेशा की तरह आपका अपना अंदाज मुखर हुआ है मेरे ख्याल से एक सच्चाई और भी जोड़ी जा सकती है इसमें …और कुछ फेस मिटकर भी जीवित रह पाते हैं !

  5. बहुत खूब … सच है की सभी फेस किसी बुक की तरह होते हैं … कुछ कहते .. कुछ छिपा कर कहते … कुछ सीधे शब्दों में कहते … रचना को जबरदस्त अंदाज़ में बाँधा है …

  6. गहन भावपूर्ण अभिव्यक्ति जिसमें शब्द 'फेस' दिखला रहें हैं.मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

  7. "फेसबुक" शब्द का इस्तेमाल करते हुए कितनी गहरी बात कह दी आपने…सच तो है, हर चेहरा एक किताब है…पर हर किताब का हस्र एक सा नहीं होता…

  8. बहुत खूब !फेस बुक के बहाने सब कही अन कही कह दी साहित्य जगत की -सच मुच कुछ किताबें लाइ -ब्रेरी में चाटतीं हैं सिर्फ धूळ,कुछ होती हैं निर्मूल ,नया प्रतीक और बिम्ब विधान ओढ़े कविता नटी सबकी कह गई बात .

  9. aap ki kavita part dr part khulti chali gai aur ek naya chehra samne aaya is duniya ka .aap ne to sach ke drshan kara diye .bahut sunder kavita rachana

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