क्षणिकाएँ

(1) बसंत

भौरों को दिखला कर
कलियों के नए बाग
अंजुरी भर प्यार देकर
किधर गया फिर बसंत !

चूमकर होठों को
फूंककर प्राण नया
बोलो न तड़पाकर
किधर गया फिर बसंत !

(2)चक्रव्यूह

परिवर्तन चाहता है आदमी
मोह जगाती है जगह
चक्रव्यूह सा पाता हूँ चारों ओर
याद आती है एक पौराणिक कथा
अभिमन्यु मारा जाता है।

(3)प्रेम

बांधना चाहता हूँ तुझे
गीतों में
फैलती जाती है तू
कहानी बनकर।

(4) मजदूर

उसके एक हाथ
पत्थर कूटते-कूटते
पत्थर के हो चुके थे
और दूसरे में
उंगलियाँ थी ही नहीं।

(5) किसान

उसके खेत
उसके पैर की बिवाइयों की तरह
फट चुके हैं

ये वही खेत हैं
जिसे उसने
पिछली बाढ़ के बाद
बमुश्किल
ढूँढ निकाला था।

(6) कारण

मौत को देखकर
परिंदा उड़ना भूल गया
यही उसकी
शर्मनाक मौत का कारण बना।
………………………………………………………

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40 thoughts on “क्षणिकाएँ

  1. ब्लागिंग में कुछ समस्याएं आ रही हैं…ब्लॉग इन ड्राफ्ट का प्रयोग करता था। इसका फीचर बदल गया लगता है। नई पोस्ट कैसे पोस्ट हो यह नहीं समझ में आ रहा।हमारीवाणी में यह पोस्ट नहीं दिख रही। जबकि पहले की तरह ही क्लिक किया था!

  2. बांधना चाहता हूँ तुझेगीतों मेंफैलती जाती है तूकहानी बनकर।अहा!क्या बात कही है देवेन्द्र भाई आपने। इस पर तो सौ गीत/कविता कुर्बान!

  3. अलग अलग रंग लिए सभी क्षणिकाएं…पर सभी मन को छूने और अपने ही रंग रंगने में समर्थ..बहुत बहुत सुन्दर…किसे कम कहूँ,किसे अधिक…

  4. बांधना चाहता हूँ तुझेगीतों मेंफैलती जाती है तूकहानी बनकर।वाह …बहुत खूब कहा है ।

  5. सभी क्षणिकाएं सुन्दर .बांधना चाहता हूँ तुझेगीतों मेंफैलती जाती है तूकहानी बनकर।यह सबसे बढ़िया लगी .

  6. एक से बढ़कर एक गहरे अर्थों और संवेदना भरी लम्बी तासीर उदगमित करती क्षणिकाएं !कमाल करते हो बेचैन भाई !

  7. पहली तो बेजोड़ है -बसंत मुआ ऐसा ही करता है! आस दिलाकर निराश करता है !

  8. उसके एक हाथपत्थर कूटते-कूटतेपत्थर के हो चुके थेऔर दूसरे मेंउंगलियाँ थी ही नहीं।एक एक क्षणिका भाव पूर्ण्………सुंदर प्रस्तुति।

  9. दूसरे नंबर की क्षणिका सबसे अछ्छी लगी.आपकी ब्लागिंग की परेशानी कैसे हल होगी ये मुझे मालूम नहीं,नहीं तो अवश्य कोशिश करता.

  10. आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हूलिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/ आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें. अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।– hai

  11. देवेन्द्र जी सारी क्षणिकाएं बहुत सुन्दर और लाजवाब रहा! दिल को छू गयी हर एक क्षणिकाएं! बेहतरीन प्रस्तुती!

  12. बांधना चाहता हूँ तुझेगीतों मेंफैलती जाती है तूकहानी बनकर।बेहतरीन………….

  13. हर क्षणिका ने बाँध लिया … कुछ शब्दों में गहरी बातें कहती हैं क्षणिकाएं और आपने पूरा इन्साफ किया है … बहुत लाजवाब …

  14. आखिरी क्षणिका ने स्तब्ध सा कर दिया क्य परिन्दा क्या मनुष्य सभी यही तो करते है सभी क्षणिकाये लाज्बाब है आभार

  15. बांधना चाहता हूँ तुझेगीतों मेंफैलती जाती है तूकहानी बनकर।Beautiful expression .

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