दिमाग तो सात तालों में बंद है…..!

स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय के लम्बे सफर के बाद
ज्ञान हुआ
मेरे पास भी दिमाग है
लेकिन जब भी काम लेना चाहता
धोखा देता
काम नहीं आता

काफी ठोकरें खाने के बाद
जान पाया कि
दिमाग तो
सात तालों में बंद है
और चाभियाँ
गुरूजी के पास हैं !

सबसे पहले स्कूल वाले गुरूजी को पकड़ा
गुरूजी !
आपने जो दिमाग दिया था
वह तो ताले में बंद हो गया है
काम नहीं करता
चाभी घुमाइये न गुरूजी

थक हार कर
गुरूजी बोले
इसमें तो धर्म का ताला लगा है
मैं नहीं खोल सकता !

भागा भागा
कॉलेज वाले गुरूजी के पास गया
उन्होने भी प्रयास किया
हार कर बोले
इसमें तो
जाति का भी ताला लगा है
मैं नहीं खोल सकता !!

विश्वविद्यालय पहुँचा
गुरूजी बोले
इसमें धर्म जाति का ही नहीं
काम क्रोध लोभ मोह
कई प्रकार के ताले लगे हैं
और तो और
भ्रष्ट आचरण की जंग ने
सभी को
मजबूती से जकड़ रखा है
इन्हें तो मैं भी नहीं खोल सकता !!!

तो मैं क्या करूँ गुरूजी ?
क्या मान लूँ कि
यह जीवन व्यर्थ ही बीत गया ?

गुरू जी हंसकर बोले
नहीं नहीं….
तुम्हारा दिमाग काम नहीं कर रहा इसलिए समझ नहीं रहे
तुम्हारी तरह बहुत से लोग ऐसे हैं
जो अपनी जेब नहीं तलाशते
और मेरे पास आते हैं
दिमाग पर ताले
किसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैं
इसलिए इनकी चाभियाँ भी
तुम्हारे ही पास हैं

देखो !
अहंकार के तले कहीं दबा होगा
मिल जायेगा।

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38 thoughts on “दिमाग तो सात तालों में बंद है…..!

  1. @@दिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंदेखो !अहंकार के तले कहीं दबा होगामिल जायेगा।..—सही बात.

  2. तुम्हारी तरह बहुत से लोग ऐसे हैंजो अपनी जेब नहीं तलाशतेऔर मेरे पास आते हैंदिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंबहुत सही लिखा है आपने…

  3. देखो !अहंकार के तले कहीं दबा होगामिल जायेगा।sunder darshnik kavita .bhavon ka prabhav kamal hai aapki soch ko namanrachana

  4. ताले भी कई हैं और जिनके तले कुंजी दबी हैं वे भी कई हैं।गहरी बात कह गये बंधु और कुछ सोचने को मजबूर करती है आपकी प्रस्तुति।

  5. दिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंबहुत सार्थक पंक्तियां….

  6. ताले की कुंजी यदि स्वयम के पास हो तो कुछ हल भी निकले परन्तु यदि कुंजी किसी और के पास हो तो फिर कोई क्या कर सकता है ….बहुत बढ़िया लेख

  7. पांडे जी!इस दर्शन पर तो सादर खड़े होकर ताली बजाने को जी कर रहा है!! अद्भुत ज्ञान है यह.. देवता भी मेरे तेरे, प्रार्थना गृह भी मेरे-तेरे के तले और तो और जीवन की चर्या में भी भला उसकी कमीज़ मेरी कमीज़ से सफ़ेद कैसे का भाव!! यह सब हमारे दिमाग की कुंजी को छिपा देते हैं.. आज कोई मजाक नहीं.. बस नमन!!

  8. गुरू जी हंसकर बोलेनहीं नहीं….तुम्हारा दिमाग काम नहीं कर रहा इसलिए समझ नहीं रहेतुम्हारी तरह बहुत से लोग ऐसे हैंजो अपनी जेब नहीं तलाशतेऔर मेरे पास आते हैंदिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंदेखो !अहंकार के तले कहीं दबा होगामिल जायेगा।bahut khoob

  9. गुरु जी………..आप और आपकी रचनाएँ वाकई अलग हैं………कितनी सहजता से आप बात को कितनी गहराई में ले जाते हैं…..आपके ब्लॉग पर पढ़ी उत्कृष्ट रचनाओं में से एक लगी ये पोस्ट…………हैट्स ऑफ इसके लिए |

  10. दिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंवाह …बहुत ही बढि़या ।

  11. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  13. सच है , अहंकार के ताले ही मतिभ्रम पैदा कर देते हैं। कुंजी हम व्यर्थ तलाशते फिरते हैं।

  14. पहले तो पता ही नहीं लगता कि अक्ल पर ताले जड़े हैं . और जिस स्तर पर यह बोध जागा ,एक तो वहाँ तक पहुँचना मुश्किल. पहुँचने पर जिसने चेताया वही असली गुरु .'अप्प दीपो भव' की बहुत सुन्दर व्यंजना !

  15. दिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंदेखो !अहंकार के तले कहीं दबा होगामिल जायेगा।बहुत बढ़िया प्रस्तुति.सादर बधाई.

  16. गहन चिंतन दर्शाती ये कविता बहुत ही अच्छी लगी | ……आपका बहुत -बहुत धन्यवाद् ….

  17. सुन्दर रचना .काश ! हम अहंकार से दूर हो पाते.प्रकृति ने अहंकार खुद की रक्छ्या करने के लिए दिया,मगर समाज ने अनेक तरह के अहंकार से बडा सा बोझ सर पे रख दिया.

  18. दिमाग पर तालेकिसी और ने नहीं तुम्हीं ने लगाये हैंइसलिए इनकी चाभियाँ भीतुम्हारे ही पास हैंदेखो !अहंकार के तले कहीं दबा होगामिल जायेगा।….लाजवाब प्रस्तुति। सच है हम अपने आप ही अपने दिमाग पर ताला लगा देते हैं।

  19. वाह गुरु, आप तो गुरुतर, गुरुतम निकले…. बोले तो गुरु घंटाल!! क्या फलसफाना अंदाज है आपका…सच में धन्य हुए हम.

  20. भई वाह………………… क्या कटाक्ष है दिमाग आपका तो किसी ताले में नहीं बंद है तभी तो इतना खूबसूरत लेखन सार्थक हुआ .

  21. दिमाग अगर सात तालों में बंद हो जाता तो कितना अच्छा होता ………………….कोई बलबा नहीं ,कोई हुजूम नहीं ,बस एक शांत दिमाग दुनिया की उथल पुथल से बेखबर होता और इंसान कितने सुकून में होता ……………ये इंसान है पूरा दिमाग तिकडमों में लगाता है …………..गलत आचरण करता है और फिर बहाने बनाता है कि दिमाग तो ससुरा ………….पर निश्चित ही आपका दिमाग किसी भी ताले में बंद नहीं है इसलिए इतना खूबसूरत लेखन सार्थक हुआ है ……..अच्छा तो आप लिखते ही है

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