रखता हूँ अपनी जेब में अब छुपा के हाथ…

गज़ल लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। यह विधा मुझे बहुत कठिन लगती है। कभी कभार हिमाकत कर बैठता हूँ। गलतियाँ बतायेंगे तो सुधारने का प्रयास करूंगा। सुधार देंगे तो और भी अच्छी बात हो जायेगी।

गुजरे हैं फिर करीब से वो उठा के हाथ
करते थे बात देर तक जो मिला के हाथ

वादे पे उनके हमको इतना यकीन था
करते थे याद नींद में हम हिला के हाथ

उठ जाये ना भूल से फिर उनको देखकर
रखता हूँ अपनी जेब में अब छुपा के हाथ

मिल जायेगा अगर कहीं पहुँचा हुआ फकीर
पूछेंगे इसका राज तब हम दिखा के हाथ

करता हूँ अब तो दूर से सबको मैं सलाम
जब से गई है जिंदगी मुझसे छुड़ा के हाथ

………………………
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40 thoughts on “रखता हूँ अपनी जेब में अब छुपा के हाथ…

  1. वादे पे उनके हमको इतना यकीन थाकरते थे याद नींद में हम हिला के हाथउठ जाये ना भूल से फिर उनको देखकररखता हूँ अपनी जेब में अब छुपा के हाथबहुत खूब ..प्रवीण जी सलाह पर ध्यान दीजिए

  2. करता हूँ अब तो दूर से सबको मैं सलामजब से गई है जिंदगी मुझसे छुड़ा के हाथइस ग़ज़ल के लिए एक शब्द है .. लाजवाब!!

  3. पोस्ट मा आप इजाजत दिहे अहैं, यहिलिये हम आपै के भावन कै यक दूसर ड्राफ्ट आपके सामने रखत अहन, बतायौ भइया कि केस लागत बाटै: “ गुजरे हैं फिर करीब से वो हाथ उठा के,करते थे देर तक जो बात हाथ मिला के।वादे पे उनके हमको बहोत ऐतबार था,करते थे याद नींद में भी हाथ हिला के।उठ जाए न भूले से कभी देख के उनको,रखता हूँ अपनी जेब में अब हाथ छुपा के।मिल जायगा अगर कहीं पहुँचा हुआ फकीर,पूछेंगे इसके राज अपन हाथ दिखा के।करता हूँ तबसे,दूर से सबको सलाम मैं,जीवन हुआ बेगाना, जबसे हाथ छुड़ा के।

  4. देवेन्द्र भाई ,मज़ा आ गया आज आपकी ग़ज़ल पढ़ के, बेहतरीन भाव ….कृपया लिखते रहें ! बेहतरीन शायर और लेख़क क्लास में नहीं सीखते, जो दिल से निकले वही ग़ज़ल है !

  5. उठ जाये ना भूल से फिर उनको देखकररखता हूँ अपनी जेब में अब छुपा के हाथरोमांचित कर देने वाला शेर……

  6. सुन्दर,और भी लिखिये.मगर गजल की एक बात मेरी समझ मे नहीं आती कि सुरु मे एक भाव होता है,और दूसरी लाइनों मे कुछ और होता है.मगर आपकी गजल मे सुरु से अन्त तक एक ही भाव है,जो मुझे बहुत अछ्छा लगा.

  7. देव बाबू क्या बात है इतनी शानदार तो ग़ज़ल कही है आपने…….इसमें सुधार की गुंजाइश कहाँ है मुकम्मल ग़ज़ल है ………..वाह …दाद कबूल करें|

  8. गुजरे हैं फिर करीब से वो उठा के हाथकरते थे बात देर तक जो मिला के हाथक्या बात है देवेन्द्र जी. मज़ा आ गया. शानदार ग़ज़ल है भाई. इस शेर को अपने फ़ेसबुक स्टेटस पर डाल रही हूं, बिना पूछे 🙂

  9. बहुत ही सुन्दर भाव भर दिए हैं पोस्ट में……..शानदार| नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं.

  10. करता हूँ अब तो दूर से सबको मैं सलामजब से गई है जिंदगी मुझसे छुड़ा के हाथनिराश होने की जरूरत नही है । वो जिंदगी फिर वापस आकर आपका हाथ पकड़ लेगी,जाएगी कहाँ । बहुत अच्छा लगा । धन्यवाद ।

  11. मिल जायेगा अगर कहीं पहुँचा हुआ फकीरपूछेंगे इसका राज तब हम दिखा के हाथ जो सुधार किया है उससे original वाला ही ठीक है …………..सबसे अच्छा जो लगा वो हमने अपने कमेन्ट में सुरक्षित किया है

  12. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! हर एक शब्द लाजवाब है! शानदार प्रस्तुती!आपको एवं आपके परिवार को नवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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