वह आया, घर के भीतर, चुपके से…!

वह
चुपके से आया।
वैसे नहीं
जैसे बिल्ली आती है दबे पांव किचेन मे
पी कर चली जाती है
सारा दूध
वैसे भी नहीं
जैसे आता है मच्छर
दिन दहाड़े
दे जाता है डेंगू
न खटमल की तरह
गहरी नींद
धीरे-धीरे खून चूसते
न असलहे चमकाते
न दरवाजा पीटते
वह आया
बस
चुपके से।
न देखा किसी ने, न पहचाना
सिर्फ महसूस किया   
आ चुका है कोई
घर के भीतर
जो कर रहा है
घात पर घात।
तभी तो…

कलकिंत हो रहे हैं
सभी रिश्ते 

धरे रह जा रहे हैं
धार्मिक ग्रंथ 

धूल फांक रहे हैं
आलमारियों में सजे
उपदेश

खोखले हो रहे हैं
सदियों के 
संस्कार
नहीं
कोई तस्वीर नहीं है उसकी मेरे पास
नहीं दिखा सकता
उसका चेहरा
नहीं बता सकता
हुलिया भी
मैं
अक्षिसाक्षी नहीं
भुक्त भोगी हूँ
ह्रदयाघात से पीड़ित हूँ
यह भी नहीं बता सकता 
कब आया होगा वह
सिर्फ अनुमान लगा सकता हूँ 


तब आया होगा
जब हम
असावधान
सपरिवार बैठकर
हंसते हुए
देख रहे थे
टीवी।
हाँ, हाँ
मानता हूँ
इसमें टीवी का कोई दोष नहीं
था मेरे  पास
रिमोट कंट्रोल।
…………………..
अक्षिसाक्षी=चश्मदीद गवाह।
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42 thoughts on “वह आया, घर के भीतर, चुपके से…!

  1. बड़ी अब्स्ट्रेक्ट कविता, सनी लियोन की बात तो नहीं कर रहे हैं -अनिन्द्य सौन्दर्य का झटका ऐसे ही होता है 🙂

  2. जो जिस भाव से पढ़े उसे वही भाव दिखाए दे.. पांडे जी हर बार की तरह प्रभावित करने वाली कविता..कीचन = किचेनतश्वीर = तस्वीर 🙂 पता है यह टाइपिंग की त्रुटि है!!

  3. काउच पोटैटो का कमाल।हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, टाइप २ डायबीटीज — सब आते हैं ऐसे कि पता नहीं चलता!

  4. हमने अपना जीवन इतना आराम तलब कर लिया है कि इस तरह के कई तत्व चुपके से आ जाते हैं और घर कर लेते हैं हमारे तन में, मन में।

  5. बहुत खूब देवेन्द्र भाई! सच है, हम लोगों ने अपना कंट्रोल रिमोट के हाथों मे सौंप दिया है…

  6. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/http://seawave-babli.blogspot.com/

  7. Devendra bhai…Padh rahe hain, hum bhi arse se….Yahan har blog ko…Par na koi 'Atma, bechain' aisi hai lagi..Kavita main jo kuchh dikha, wo hai humari bhi vyatha..Koi yun chup-chap ghar main, sabke hi hai aa ghusa…Par yahan control hai ki, haath main remote hai..Aaj 'net', par, de raha, ek aatmghati chot hai…Ek click se door hain ab, sur, sura aur sundri..Facebook, twiter main fanskar, rah gaya hai aadmi…Aaj se hum bhi aapke sahchar hain…aapke blog ka anusaran karte hue..Shubhkamnaon sahit..Deepak Shukla..@ es kavita ke pahle hi comment se meri tippani bhi prabhavit hai.. Achha hai aapne link nahi diya…:)

  8. वाह! बहुत सुन्दर जी.बाउंसर हो या गुगली,पसंद आई जी.अच्छी प्रस्तुति के लिए आभार.मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

  9. अपने ह्रदय के भाव इस रचना में ध्वनित पा रही हूँ…कोटिशः आभार…इसके आगे क्या कहूँ, सबकुछ कह तो दिया आपने…

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